पुरुष रेप क्यों करते हैं, कौन-सी गुत्थी है ?

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किसी रेपिस्ट दिमाग की वह कौन-सी गुत्थी है जो कई बार उन्हें इतना उलझा देती है कि वे रेप जैसी घिनौनी और अमानवीय हरकत कर गुजरते हैं। किसी रेपिस्ट की सोच, उसके दिमाग के काम करने का तरीका और आगे बढ़कर अपनी इस घिनौनी सोच को अंजाम तक पहुंचा देने की पूरी प्रक्रिया ह्यूमन सेक्शुअलिटी का शायद सबसे स्याह पहलू है। तमाम विशेषज्ञ बरसों से उन मनोवैज्ञानिक ताकतों और दबावों को जानने-समझने की कोशिश करते रहे हैं, जो किसी इंसान को सेक्शुअल वॉयलेंस के लिए प्रेरित करते हैं।

अनियंत्रित कामेच्छा है जड़?
रेप को लेकर आम सोच यह रही है कि रेप की वजह अनियंत्रित कामेच्छा है, जो किसी पल विशेष में इंसान के दिमाग पर जबर्दस्त तरीके से हावी हो जाती है। इसी अनियंत्रित कामेच्छा को संतुष्ट करने के लिए वह रेप जैसी सेक्शुअल वॉयलेंस की ओर कदम बढ़ा देता है। लेकिन इस मामले में हुई तमाम रिसर्च इस बात को प्रमाणित करती नजर आती हैं कि एक रेपिस्ट के मस्तिष्क में होने वाली मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल में सेक्शुअल डिजायर से ज्यादा ताकतवर किसी महिला पर हावी होने और उसे कष्ट में तपड़ते देखने की चाह होती है और इसी चाहत को पूरा करने के लिए वह इंसान सेक्स को माध्यम बनाता है। सेक्स करने की सामान्य और सहज प्राकृतिक इच्छा इस काम में गौण हो जाती है।

क्या कहती हैं रिसर्च रेपिस्ट के मस्तिष्क को अच्छी तरह से पढ़ने के लिए बहुत समय पहले कनाडा में एक रिसर्च की गई, जिसमें कुछ सामान्य पुरुषों को शामिल किया गया। उन्हें सेक्स संबंधी कुछ सीन दिखाए गए और सेक्स पर आधारित बातें सुनाई गईं। इस दौरान उनके प्राइवेट पार्ट में होने वाले रक्त के प्रवाह को स्टडी किया गया। इस रिसर्च में शामिल साइकॉलजिस्ट डॉ. हॉर्वर्ड बारबेरी ने बताया कि जब इन पुरुषों को ऐसे सेक्शुअल सीन दिखाए गए जिनमें महिला पुरुष के बीच सहमति से सेक्स हो रहा था, तो उनके प्राइवेट पार्ट में रक्त प्रवाह पूरी तरह से सामान्य था। इसके बाद इन पुरुषों को ऐसे सीन दिखाए गए जिनमें महिलाओं को सेक्स के लिए बाध्य किया जा रहा था, जिनमें महिलाएं कष्ट और परेशानी से तड़प रही थीं। ऐसे सीन देखकर इन पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की उत्तेजना में पहले के मुकाबले करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसका अर्थ यह है कि इतनी उत्तेजना के साथ वे सेक्स कर पाने में समर्थ नहीं होंगे। जैसे-जैसे महिला के ऊपर जोर जबर्दस्ती बढ़ाई जाती रही, इनकी उत्तेजना में गिरावट होती गई।

बाद में यही प्रयोग कुछ ऐसे पुरुषों पर भी दोहराया गया जो रेप के दोषी करार दिए जा चुके थे। इन लोगों में से ज्यादातर में सहमति से होने वाले सेक्स के मुकाबले जबर्दस्ती होने वाले सेक्स सीनों के दौरान ज्यादा उत्तेजना दर्ज की गई। आपसी सहमति से होने वाले सेक्स सीन के मुकाबले इन लोगों के प्राइवेट पार्ट में रक्त प्रवाह तब ज्यादा बढ़ गया, जब उन्होंने महिला को परेशानी में देखा। जैसे-जैसे महिला पर ज्यादा कष्ट ढाया जाता रहा, ऐसे लोगों की उत्तेजना बढ़ती गई। इस रिसर्च को द जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऐंड कंसल्टिंग साइकॉलजी में भी छापा गया।

कारण कई
इसी तरह की और न जाने कितनी रिसर्च इस बात को प्रमाणित करने के लिए काफी हैं कि पुरुष के मन में महिला के साथ रेप करने की इच्छा के जाग्रत होने के पीछे न तो महिलाओं के द्वारा पहने जाने वाली भड़काऊ पोशाक का कोई रोल है, न उसकी भाव भंगिमा का और न ही उसके आमंत्रण के भावों का। खुद पुरुष की सेक्स को लेकर किसी अतृप्त इच्छा भी इसके पीछे की वजह नहीं होती।

जाने-माने साइकिएट्रिस्ट डॉ. समीर पारेख के मुताबिक, रेप का सेक्शुअलिटी, सेक्शुअल डिजायर या महिला के प्रति आकर्षण से कोई लेना-देना नहीं है। आकर्षण या सेक्शुअल डिजायर को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन कभी-कभी उसके साथ कुछ दूसरे कारक भी मिल जाते हैं। और न सिर्फ मिल जाते हैं, बल्कि हावी हो जाते हैं। ऐसे में इंसान रेप जैसी वारदात की ओर बढ़ता है। यह विशुद्ध रूप से सैडिस्टिक अप्रोच है, जो किसी इंसान के भीतर एक दिन में डिवेलप नहीं होती और न ही ऐसे फैसले कोई शख्स तुरत-फुरत ले सकता है। इस तरह के लोगों की एक अलग तरह की पर्सनैलिटी होती है, जिसके बनने में वक्त लगता है और उसके पीछे एक नहीं, बहुत से कारण जिम्मेदार होते हैं। सेक्स की इच्छा पूर्ति करने की भावना इसमें बहुत पीछे होती है।

रेपिस्ट के दिमाग की गुत्थियां जो उसे बना देती हैं इंसान से हैवान

1. दोस्तों का प्रेशर

ज्यादातर मामलों में ऐसे लोगों का पीयर ग्रुप यानी उनके आसपास के लोग और मित्रमंडली भी ऐसे ही होंगे। ये लोग उन्हें ऐसे काम करने के लिए उकसाते हैं और यह भरोसा दिलाते हैं कि तुम पकड़े नहीं जाओगे और तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगड़ेगा। ऐसे लोग आमतौर पर अकेले नहीं होते। उनका पूरा ग्रुप होता है और उस ग्रुप में वे अकसर ऐसी बातों को डिस्कस करते हैं। यही वजह है कि अकसर तीन-चार लोगों के मिलकर रेप करने के मामले सामने आते हैं।

2. महिलाओं के प्रति अनादर का भाव
ऐसे लोगों के ग्रोइंग फेज यानी उम्र के उस पड़ाव को देखें जब वे बड़े हो रहे थे और बचपन से जवानी में प्रवेश कर रहे थे, तो पता चलता है कि उस दौर में महिलाओं के प्रति उनका नजरिया सम्मानपूर्ण नहीं था। महिलाओं को लेकर वे पूर्वाग्रहों से ग्रस्त थे। महिलाओं के लिए उनके मन में इज्जत के भाव नहीं रहे। उनके मन में हमेशा यह बात हावी रही कि महिलाएं पुरुषों से नीचे दर्जे की हैं।

3. नशीले पदार्थ
नशीले पदार्थों और शराब के जरूरत से ज्यादा सेवन की भी रेपिस्ट तैयार करने में बड़ी भूमिका है। रेप की घटनाओं को अंजाम देने से पहले ऐसे लोग ज्यादातर मामलों में नशे में पाए जाते हैं। नशा ही उन्हें यह भरोसा दिलाता है और उनके भीतर यह आत्मविश्वास भरता है कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। उनके भीतर एक तरह का परवर्टेड सेंस ऑफ पावर आ जाता है। जिस वक्त वे ऐसा कर रहे होते हैं, उस वक्त उनके दिमाग में यह बात साफ होती है कि हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। इस तरह का चिंतारिहत दिमाग उन्हें उत्तेजित करने में भी मदद करता है।

4. पॉरनॉग्रफ़ी का पेच
जरूरत से ज्यादा पॉरनॉग्रफ़ी देखना भी किसी रेपिस्ट के मस्तिष्क का एक अहम पहलू है। पाया गया है कि ऐसे लोग जरूरत से ज्यादा पॉरनॉग्रफ़ी देखते हैं, वैसी कल्पनाएं करते हैं और फिर उन कल्पनाओं को साकार करने की प्रवृत्ति उन्हें किसी महिला को अपना निशाना बनाने के लिए उकसाती है।

5. सैडिस्ट अप्रोच
ऐसे लोगों को अपने शिकार के बारे में बुरा महसूस नहीं होता। उन्हें लगता है कि जिस महिला के साथ वे ऐसी हरकत करने जा रहे हैं, वह कोई इंसान नहीं है, बल्कि कोई सेक्स ऑब्जेक्ट है, जिसे दर्द नहीं होता, जिसका मन नहीं दुखता। महिला को कष्टपूर्ण हालत में देखकर, उसे चीखते-चिल्लाते देखकर उन्हें आनंद मिलता है। महिला के प्रति उनके मन में कोई संवेदना नहीं होती।

6. पछतावे के भाव की कमी ऐसे लोगों के मन में उस काम को लेकर कोई पछतावा नहीं होता, जो वे कर रहे हैं। साथ ही एक तरह की हीन ग्रंथि उनके भीतर ही भीतर पनप रही होती है। वे बार-बार उसी काम को दोहरा सकते हैं, बिना किसी पछतावे के। यही वजह है कि तमाम ऐसे लोग रेप के मामले में पकड़े जाते हैं, जो पहले भी कई महिलाओं को अपना शिकार बना चुके हैं।

7. हावी होने की इच्छा
किसी महिला पर हावी होने की टेंडेंसी, उसे यह जताने की कोशिश कि तुम्हारी कोई औकात नहीं है, तुम बेहद कमजोर हो, हम तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकते हैं, भी रेप के मामलों के लिए जिम्मेदार है। इस तरह के भाव रेप करने वालों के दिमाग में धीरे-धीरे गहरे होते जाते हैं और उन्हें रेप करने के लिए उकसाते हैं।

8. प्रीप्लानिंग से काम
कोई इंसान रेप करने का फैसला अचानक नहीं लेता, यह उसी पल होने वाला और तुरत-फुरत लिए गए फैसले के आधार पर होने वाला कृत्य कतई नहीं है। रेप प्रीमेडिटेटेड होते हैं, इसलिए यह कह देना सही नहीं है कि किसी खास परिस्थिति में किसी के सेक्शुअल इंपल्स इतने ज्यादा हो गए कि ऐसा कदम उठ गया। ऐसे काम को करने की प्लानिंग पहले से मन में चल रही होती है और उसे खूब सोच- समझकर अंजाम दिया जाता है। यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में रेपिस्ट महिला का ही कोई जानकार होता है, जो काफी पहले से उसे जानता होता है।

 

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