स्तनपान और प्रसवोपरान्त स्तन इन्फैक्शन

 

प्रसव के कितनी देर बाद से स्तनपान शुरू करवाना चाहिए?


स्वभाविक प्रसव के कम से कम आधे घन्टे के बाद स्तनपान शुरू करना चाहिए और सिजेरियन सैक्शन के चार घन्टे के बाद।

कितनी बार स्तनपान कराना चाहिए?

दिन के समय दोनों स्तनों से कम से कम 10-15 मिनट तक हर दो या ती घन्टे के बाद कराना चाहिए।

 
दिन में हो सकता है कि आपको बच्चे को जगाना पड़े (डॉयपर बदलने या बच्चे को सीधा करने अथवा उस से बातें करने से बच्चे को जगाने में मदद मिलती है) ताकि आप को रातें आराम से गुजरें। जब बच्चे की पोषण परक जरूरतें दिन के समय ठीक से पूरी हो जाती हैं तो फिर वह रात को बार बार नहीं जगता। कभी कभी ऐसा भी होता है कि आप के स्तन रात को भर जाते हैं और शिशु सो रहा होता है, आप चाहते हैं कि उसे जगाकर दूध पिला दें। जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है, दूध पिलाने की अवधि बढ़ती जाती है।
 

 

स्तनों की ऐंठन से कैसे बचा जा सकता है?

स्तनों की ऐंठन से बचने के लिए स्तनपान के अन्तराल को कम करना पड़ेगा जैसे कि डेढ़ या दो घन्टे के बाद देते रहें जब तक कि ऐंठन घटने न लग जाए।

 

 


मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे बच्चे को पर्याप्त दूध मिल रहा है?

यदि 24 घन्टे की अवधि में आपका शिशु चार से छह डॉयपर गीले करता है तो उसका अर्थ है कि आप उसे अच्छी मात्रा में स्तनपान करा रही है। स्तनपान भली प्रकार हो रहा है इसका दूसरा लक्षण यह है कि दूध पिलाने के बाद आप के स्तन नरम हो जाते हैं।

दूध आने से पहले भी क्या बच्चे को स्तनों से कुछ मिलता है?

हाँ, आपके स्तन उसे कोलोस्ट्रम देते हैं जो कि एन्टीबॉडिस से भरपूर गाढ़ा दूध होता है। यह लैक्सेटिव का काम करता है और मैकोनियम (काले टैरलमल) और बिल्लिरूबिन (जिससे बच्चे को पीलिया/पीला हो सकता है) को बच्चे के शरीर से निकालने में मदद देता है।

प्रसवोंपरान्त स्तन इन्फैक्शन क्या होती है और उसका कारण क्या होता है?

जब निप्पल में कीटाणु आ जाते हैं और किसी दरार से या स्तनपान के दौरान अन्दर चले य़ाते हैं तो उसे प्रसोवोपरान्त स्तन इन्फैक्शन कहते हैं।

प्रसवोपरान्त स्तन इन्फैक्शन के लक्षण क्या होते हैं?

इसके स्तनों में सूजन और पीड़ा होती है, ऊपर की त्वचा में लालिमा आ जाती है, साथ में बुखार आ भी सकता है और नहीं भी आ सकता।

प्रसवोपरान्त स्तन इन्फैक्शन में क्या करना चाहिए?

स्तनपान कराते रहें और एन्टीबॉयटिक के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

यदि तुरन्त इलाज न करायें तो क्या होता है?

यदि इलाज तुरन्त न कराया जाए तो उससे स्तनों में पस बन सकती है।

दुखते निप्पल किस कारण होते हैं?

जब आप पहले पहल स्तनपान कराना सीखती है तब उन्हें किस तरह शिशु के मुँह में रखा जाए उस में गलती के कारम निप्पल दुखने लगते हैं।

निप्पलों के दुखने से कैसे निपटें?

बच्चे के होठों को सही ढंग से निप्पल के बीचों बीच रखें जहां से दूध निकलता है, न कि उसके टिप पर रखें जहाँ कि बहुत सी नसें समाप्त होती है - इस प्रकार दुखने से बच सकती हैं।

बच्चा अचानक भूखा क्यों हो जाता है? 

शिशुओं में सामान्यतः 1-2 सप्ताह के होने पर छह हफ्ते का होने पर और तीन महीने का होने पर वृद्धि की लहर उठती है। उस समय एक दो दिन तक हो सकता है कि बच्चा दुगना भोजन चाहे और बच्चे की मांग को पूरा करने के लिए माँ के स्तनों में दूध स्वयंमेव बढ़ जाता है।

स्तनपान के दौरान स्तनों में लम्प क्यों बन जाते हैं और उन से कैसे निपटना चाहिए?

स्तनपान के दौरान स्तनों में लम्प सामान्य बात है जो कि किसी छिद्र के बन्द होने से बन जाता है। दूध पिलाने से पहले (गर्म पानी से स्नान या सेक) सेक और स्तनों की मालिश करें (छाती से निप्पल की ओर गोल गोल कोमलता से अपनी अंगुली के पोरों से करें या पम्प द्वारा निकाल दें। बन्द छिद्र या नली को खोल लेना महत्वपूर्ण है नहीं तो स्तनों में इन्फैक्शन हो सकता है। यदि इस सब से लम्प न निकले या आपको फ्लू के लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर को बुलायें।

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