वर्ष 2011 का नोबेल शांति पुरस्कार संयुक्त रूप से तीन महिलाओं को

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ओस्लो। महिलाओं के अधिकार विश्व शांति के लिए अहम हैं। नोबेल समिति ने शुक्रवार को यह कहते हुए वर्ष 2011 का नोबेल शांति पुरस्कार संयुक्त रूप से तीन महिलाओं को देने की घोषणा की। इनमें लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन जॉनसन सरलीफ, लाइबेरिया की ही सामाजिक कार्यकर्ता लेमाह बोवी और गृहयुद्ध व आतंकवाद से जूझ रहे यमन की तवाक्कुल करमान शामिल हैं।

 

 

 

तीनों को ही यह प्रतिष्ठित पुरस्कार गृहयुद्ध के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए उनके अहिंसक संघर्ष के लिए दिया जा रहा है। सरलीफ (72) किसी अफ्रीकी देश की पहली निर्वाचित महिला राष्ट्रपति हैं। वह 2006 में लाइबेरिया की राष्ट्रपति बनी थीं। उन्होंने देश में शांति कायम करने, आर्थिक व सामाजिक स्थिति मजबूत बनाने और महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने में अहम योगदान दिया। इसी तरह लेमाह (39) ने लाइबेरिया में गृह युद्ध के दौरान महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ी।

उन्होंने लंबे समय से जारी संघर्ष के खात्मे और चुनाव में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए सभी जाति व धर्म की महिलाओं को एकजुट होकर लड़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं पेशे से पत्रकार करमान (32) को यमन में गृहयुद्ध के दौरान कुछ समय तक जेल में भी रहना पड़ा। करमान अरब की पहली महिला हैं जिन्हें नोबेल से नवाजा गया है। नोबेल समिति के अध्यक्ष थोरर्बजोर्न जागलैंड ने कहा कि करमान को मिला पुरस्कार इस संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए कि महिलाओं और इस्लाम को अरब देशों में निरंकुश शासन के खिलाफ लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। लाइबेरिया गृहयुद्ध से पीडि़त रहा जो वर्ष 2003 तक जारी रहा। लाइबेरिया की शांति के लिए काम करने वाली लेमाह ने ईसाई और मुस्लिम महिलाओं के एक समूह का गठन किया था ताकि सरदारों को चुनौती दी जा सके। वहीं करमान ने महिला पत्रकारों के एक समूह का नेतृत्व किया। वह यमन में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले प्रमुख लोगों में शामिल थी। उनके पिता सालेह के मंत्रिमंडल में कानूनी मामलों के मंत्री रह चुके हैं। 2004 में केन्या की वांगरी मथाई के बाद किसी भी महिला को यह पुरस्कार नहीं मिला था। जॉनसन हॉर्वर्ड में प्रशिक्षित अर्थशास्त्री हैं जो वर्ष 2005 में अफ्रीका की पहली लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई राष्ट्रपति थीं।

 

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