नपुंसकता एवं नपुंसकता का उपचार

 

नपुंसकता क्या है?

यौनपरक सम्भोग में पर्याप्त आन्न्द पाने के लिए जब पुरूष का लिंग खड़ा नहीं हो पाता या खड़ा होकर रूक नहीं पाता तो उसे नपुंसकता कहते हैं।

नपुंसकता के कारण क्या होते हैं?

नपुंसकता निम्नलिखित कारणों से हो सकती है -

 

1.         मानसिक दबाव और अवसाद 

2.         शराब / ड्रग का नशा

3.         धुम्रपान 

4.         मधुमेह 

5.         हृदय रोग 

6.         उच्च रक्त चाप

7.         रक्त चाप, दबाव और पाचक रोगों में प्रयुक्त कुछ दवाइयां ।

 

 

नपुंसकता का उपचार कैसे होता है?

नपुंसकता का उपचार करने के लिए

1.  शराब और सिगरेट छोड़ दें। 

2.  (वियाग्रा) सिल्डेनाफिल टैस्टोस्टरोन जैसे ड्रग..... 

3.  मूत्रनली या लिंग में दवा का इंजैक्शन लगाये 

4.  लिंग को खड़ा करने वाले उपकरणों का प्रयोग करें। 

5.  शल्य चिकित्सा 

6.  मनोचिकित्सा।


वियाग्रा कितनी प्रभावशाली होती है?

शारीरिक अथवा मानसिक कारणों से लिंग के खड़े न हो पाने के रोग में वियाग्रा का उपयोग किया जाता है। जिन पुरूषों को हृदय तंत्री का रोग, मौल्लिटस मधुमेह, उच्च रक्त चाप, अवसाद हृदय की बाईपास सर्जरी हो चुकी हो और जो पुरूष अवसाद मुक्ति या रक्त चाप से मुक्ति देने वाली दवाएं लेते हैं उन में लिंग को खड़ा करने के लिए इसे प्रभावशाली माना जाता है। चिकित्सा प्रयोगों में, देखा गया है कि मधुमेह वाले 60 प्रतिशत और बिना मधुमेह वाले 80 प्रतिशत लोगों को वियाग्रा से लिंग के खड़े होने में बेहतर मदद मिलती है।

वियाग्रा कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?

वियाग्रा देते समय डॉक्टर रोगी की उम्र स्वास्थ्य की सामान्य स्थिति और जो दवाएं वह ले रहा हो उन सब का ध्यान रखता है। प्रारम्भ करने की अधिकतर पुरूषों में मात्रा 50 मि.ग्रा. होती है, पर सह प्रभावों एवं प्रभविषुणता को देखते हुए डॉक्टर मात्रा को बढ़ा या घटा सकता है। अधिक से अधिक 100 मि.ग्रा. प्रत्येक चौबीस घन्टे की अवधि में संस्तुष्ट की जाती है।

वियाग्रा किस प्रकार दी जानी चाहिए?

सिल्डेनाफिल 15, 50 और 100 मि.ग्रा. की मौखिक गोलियों में उपलब्ध है। सम्भोग परक गतिविधि के प्रारम्भ के एक घन्टा पहले इसे लेना चाहिए। श्रेष्ठ परिणाम के लिए इसे खाली पेट लेना चाहिए क्योंकि खाने के बाद, यदि गरिष्ठ भोजन किया हो तो इसका प्रभाव और स्राव घट जाता है।

वियाग्रा के सह प्रभाव क्या होते हैं?

बिना विशेष सह प्रभावों के वियाग्रा अधिकतर लोगों को लाभ पहुंचाती है। जो सहप्रभाव सामने आये हैं वे बहुत हल्के हैं जिसमें सिर दर्द, पानी-पानी हो जाना, नाक बन्द होना, घबराहट, गैस बनना डॉयरिहा और दृष्टि की असामान्यता (नीला नीला दिखना या चमचमाहट शामिल है।

नपुंसकता का उपचार करने के लिए लिंग या मूत्र नली में जो दवाईयां इंजैक्शन द्वारा दी जाती हैं वे कितनी प्रभावसाली होती हैं?

खड़ेपन को बनाने और बनाये रखने के लिए लिंग में सीधे दवाइयां इंजेक्शन द्वारा दी जा सकती है। हालांकि ऐसे इंजैक्शन प्रभावशाली हो सकते हैं पर उनका बहुत उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि वे बहुत पीड़ादायक होते हैं इस से लिंग में घाव भी हो सकते हैं और इस में छह घन्टे से भी अधिक लम्बे समय तक लिंग के खड़े रहने और पीड़ा देने का खतरा भी रहता है। लिंग को खड़ा करने के लिए मूत्र नली में दवा की गोली भी डाली जा सकती है। यह विधि भी अधिक लोकप्रिय नहीं है क्योंकि कई बार इससे लिंग में पीड़ा या शुक्राणुकोश में पीड़ा, मूत्रनली से हल्का रक्तस्राव, चक्कर आना और सम्भोग की साथिन की योनि में जलन जैसे प्रभाव पड़ सकते हैं।

वैक्युम यन्त्र क्या होते हैं?

मशीनी वैक्युम यन्त्र द्वारा लिंग के आसपास खालीपन का दबाव बनाया जाता है जिस से वह रक्त को लिंग में खींचता है, उसे बड़ा करता है और खड़ा करता है जिससे खड़ापन आ जाता है।

नपुंसकता के सन्दर्भ में कौन सी सर्जरी की जाती है?

नपुंसकता से ग्रस्त बहुत से पुरूषों में खड़ापन लाने के लिए परौसथीसिस नामक न डाले जाने वाले एक यन्त्र का प्रयोग किया जाता है।

मनोवैज्ञानिक थैरेपी क्या होती है?

विशेषज्ञ नपुंसकता का उपचार मनोविज्ञान आधारित तकनीक से करते हैं जिससे व्यक्ति की सम्भोग सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती है। रोगी की साथी इस तकनीक को क्रियान्वित करने में मदद दे सकती है जिसमें अंतरंगता का विकास और उत्तेजक प्रेरणा भी शामिल है। जब शारीरिक नपुंसकता का उपचार होता है उस समय भी ऐसी तकनीकें चिन्ता को दूर करने में मदद देती हैं।

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