कृत्रिम गर्भाधान कृत्रिम वीर्य प्रदान

 

कृत्रिम गर्भाधान क्या है ?

उत्तर: कृत्रिम गर्भाधान या आइवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में अंडों को अंडाशय से शल्य क्रिया द्वारा बाहर निकाल कर शरीर से बाहर पेट्री डिश में शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है। करीब 40 घंटे के बाद अंडों का परीक्षण किया जाता है कि वे निषेचित हो गये हैं या नहीं और उनमें कोशिकाओं का विभाजन हो रहा है। इन निषेचित अंडों को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है और इस तरह गर्भ-नलिकाओं का उपयोग नहीं होता है।

 
 
 

कृत्रिम वीर्य प्रदान क्या है?

इस प्रक्रिया में, विशेष रूप से तैयार किए गए वीर्य को महिला के अन्दर इंजैक्शन द्वारा पहुँचाया जाता है। कृत्रिम वीर्य़ का उपयोग सामान्यतः तब किया जाता है 

(1) अगर मर्द साथी अनुर्वरक हो 

(2) ग्रीवा परक म्यूक्स में महिला को कोई रोग हो 

(3) या दम्पति में अनुर्वरकता का कारण पता न चल रहा हो।

 

सहायक प्रजनन तकनीक (आर्ट) क्या है?

आर्ट वह संज्ञा है जिस में अनुर्वरित दम्पतियों की मदद के लिए अनेकानेक वैकल्पिक विधियां बताई गई हैं। आर्ट के द्वारा औरत के शरीर से अण्डे को निकालकर लैब्रोटरी में उसे वीर्य से मिश्रित किया जाता है और एमबरायस को वापिस औरत के शरीर में डाला जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार दूसरों द्वारा दान में दिए गए अण्डों, दान में दिए वीर्य या पहले से फ्रोजन एमबरायस का उपयोग भी किया जाता है। दान में दिए गए अण्डों का प्रयोग उन औरतों के लिए किया जाता है है जो कि अण्डा उत्पन्न नहीं कर पातीं। इसी प्रकार दान में दिए गए अण्डों या वीर्य का उपयोग कई बार ऐसे स्त्री पूरूष के लिए भी किया जाता है जिन्हें कोई ऐसी जन्मजात बीमारी होती है जिसका आगे बच्चे को भी लग जाने का भय होता है।

यह आर्ट कितना सफल रहा है?

35 वर्ष तक की आयु की औरतों में इस की सफलता की औसत दर 37 प्रतिशत देखी गई है। आयु वृद्धि के साथ साथ सफलता की दर घटने लगती है। आयु के अतिरिक्त भी सफलता की दर बदलती रहती है और अन्य कई बातों पर भी निर्भर करती है। आर्ट की सफलता की दर बदलती रहती है और अन्य कई बातों पर भी निर्भर करती है। आर्ट की सफलता दर को प्रभावित करने वाली चीज़ों में शामिल है -

(1) अनुर्वरकता का कारण 

(2) आर्ट का प्रकार 

(3) अण्डा ताज़ा है या फ्रोज़न 

(4) एमब्रो (भ्रूण) ताज़ा है या फ्रोज़न।

आर्ट के अलग-अलग प्रकार कौन से हैं?

आर्ट के सामान्य प्रकारों में शामिल हैं - 

(1) इन बिटरो उर्वरण 

(2) जीएगोटे इन्टराफैलोपियन टांस्फर (जेड आई एफ टी) 

(3) गेमेटे इन्टराफैलोपियन टांस्फर (जी आई एफ टी) 

(4) इन्टरासाईटोप्लास्मिक स्परम इंजैक्शन (आई सी एस आई)

इन विटरों फरटिलाइज़ेशन (आई वी एफ) क्या होता है?

आई वी एफ का अर्थ है शरीर के बाहर होने वाला उर्वरण। आई वी एफ सबसे अधिक प्रभावशाली आर्ट है। आमतौर पर इसका प्रयोग तब करते हैं जब महिला की अण्डवाही नलियाँ बन्द होने हैं या जब मर्द बहुत कम स्परम पैदा कर पाता है। डॉक्टर औरत को ऐसी दवाएं देते हैं जिससे कि वह मलटीपल अण्डे दे पाती है। परिपक्व होने पर, उन अण्डों को महिला के शरीर से निकाल लिया जाता है। लेब्रोटरी के एक वर्तन में उन्हें पुरूष के वीर्य से उर्वरित होने के लिए छोड़ दिया जाता है तीन या पांच दिन के बाद स्वस्थ्य भ्रूण को महिला के गर्भ में रख दिया जाता है।

ज़िगोटे इन्टराफैलोपियन ट्रांस्फर (जेड आई एफ टी) क्या होता है?

जेड आई एफ टी भी आई वी एफ के सदृश होता है। उर्वरण लेब्रोटरी में किया जाता है। तब अति सद्य भ्रूण को गर्भाशय की अपेक्षा फैलोपियन ट्यूब में डाल दिया जाता है।

गैमेटे इन्टरफैलोपियन ट्रांस्फर क्या होता है?

जी आई एफ टी के अन्तर्गत महिला की अण्डवाही ट्यूब में अण्डा और वीर्य स्थानान्तरित किया जाता है। उर्वरण महिला के शरीर में ही होता है।

इन्टरासाइटोप्लास्मिक स्परम इंजैक्शन क्या होता है?

आई सी एस आई में उर्वरित अण्डे में मात्र एक शुक्राणु को इंजैक्ट किया जाता है। तब भ्रूण को गर्भाशय या अण्डवाही ट्यूब में ट्रांस्फर (स्थानान्तरित) किया जाता है। इसका प्रयोग उन दम्पतियों के लिए किया जाता है जिन्हें वीर्य सम्बन्धी कोई घोर रोग होता है। कभी कभी इसका उपयोग आयु में बड़े दम्पतियों के लिए भी किया जाता है या जिनका आई वी एफ का प्रयास असफल रहा हो।


महिलाओं और पुरूषो में बांझपन या अनुर्वरकता

 

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