बाल स्वास्थ्य : भारत वर्ष में जन्म के समय बहुत से बच्चों का वजन कम क्यों होता है?

 

जन्म के समय जिस बच्चे का वजन 2.5 कि. ग्रा. से कम होता है उसे कम भार वाले जन्मे बच्चे के रूप में माना जाता है। भारत वर्ष में जन्म के समय कम से कम 70 प्रतिशत बच्चों का वजन किया ही नहीं जाता।

बच्चे का पोषण स्तर किशोर अवस्था और गर्भावस्था में महिलाओं के पोषण स्तर से प्रारम्भ होता है। मां का स्वास्थ्य औप पोषण अच्छे स्तर का न होने और भ्रूण का कम विकास होने के कारण जन्म के समय बच्चे का वजन कम होता है। ये शिशु संक्रमण, कमजोर प्रतिरक्षा, पढ़ाई में असमर्थता. दर्बल शारीरिक विकास से पीड़ित रहते हैं और कई मामलों में तो जन्म के तुरन्त बाद ही उनकी मृत्यु हो जाती है।

 
 
 

जिस मां को युवा अवस्था से ही संतुलित भोजन नहीं मिलता उसके कम वजन वाले बच्चे के पैदा होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और फिर यह चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। अपर्याप्त भोजन या विश्राम, धूम्रपानर, संक्रमण, वे सांस्कृतिक प्रथाएं जिनके कारण गर्भावस्था के दौरान महिला को अच्छी खुराक नहीं देते ताकि उसका वजन अधिक न हो जाए, और लंबे समय तक शारीरिक श्रम करते रहने से कम वजन वाला बच्चा पैदा के अवसर अधिक हो जाते हैं।

गर्भों के मध्य समय का अंतराल न होने और बार-बार गर्भधारण करने से भी अधिक जोखिम बढ़ जाता है।

विटामिन ए, आयोडिन, फोलेट, जिंक जैसे अन्य सूक्ष्म पौष्टिक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में न लेने के कारण मां और भ्रूण दोनों पर तथा गर्भ में पल रहै बच्चे पर गहरा प्रभाव पड़ता है।


 

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