इंजेक्शन द्वारा दिए जाने योग्य गर्भनिरोधकों के चलन का भारत में कुछ लोग विरोध क्यों करते हैं?

 

नई गर्भनिरोधक टेक्नोलॉजी जैसे कि इंजेक्शन द्वारा दिए जाने योग्य और आरोपित किए जाने वाले (इंप्लान्ट) हार्मोनल आक्रामक प्रवृति के होते हैं, दीर्घकाल तक क्रियाशील रहते हैं और जब उनका

उपयोग महिलाओं को लक्ष्य करके किया जाता है तब विकासशील देशों में इनके दुरूपयोग किए जाने की अधिक संभावना रहती है। इसके अलावा, इंजेक्शन से दिए जाने योग्य गर्भनिरोधकों से स्वास्थ्य को जोखिम होता है जो भारत में कमजोर शरीर वाली महिलाओं द्वारा सुगता से सहन नहीं किया जा सकता। इस प्रकार इसका उपयोग तो आसानी से किया जा सकता है परन्तु यह स्वास्थ्य संबंधी नई-नई समस्याओ को जन्म देता है जिससे महिला कहीं की भी नहीं रहती।

 

 
 
 

अधिकांश भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति और उनकी जानकारी का स्तर अच्छा नहीं होता तथा जब इन पर इस आक्रामक टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है तब उसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी के प्रभावी प्रयोग के लिए स्क्रीनिंग और अनुवर्ती (फॉलोअप मूल) सिद्धांत हैं। चूंकि इन दोनों को उस प्रणाली में सुरक्षित नहीं माना जा सकता जिस पर अवसंरचना और मानव संसाधनों के लिए अधिक दबाव डाला जाता है। बहुत से लोग यह तर्क देते हैं कि ऐसी विधियों को चलन से विशेषतः सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से बाहर रखना ही बेहतर है। इंजेक्शन द्वारा दिए जाने योग्य गर्भनिरोधक भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के स्वास्थ्य कार्यक्रम और परिवार कल्याण कार्यक्रम के भाग नहीं हैं परन्तु वे बाजार में उपलब्ध हैं।

 

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