गर्भवती महिला की सामान्य देखभाल : सहायक तकनीकें

 

गर्भधारण करने के कितने समय बाद तक मैं काम करती रह सकती हूँ?

जिस गर्भवती महिला को कोई समस्या न हो वह नौवें महीने तक काम करती रह सकती है। हाँ, उन्हें कुछ सावधानियां बरतनी पडेंगी जैसे कि भारी थकान वाली गतिविधि से बचें, सीढ़ियां चढ़ने, तापमान की अति और धुये भरे क्षेत्र से दूर रहें। बार-बार आराम करें और यदि थकान लगे तो जल्दी ही काम से लौट जायें यदि बहुत देर तक खड़ी रही हैं तो बैठ जायें और पैर ऊपर कर लें।

 

अन्तिम तीन महीनों में लम्बे समय तक खड़े रहना, भारी चीज़ों को उठाना, मुड़ना या झुकना नहीं चाहिए। गर्भवती महिला को नियमित भोजन करना चाहिए एक जगह बैठकर किया जाने वाला काम जिस से ज्यादा परेशानी न हो वह घर बैठने की अपेक्षा कम दबाव वाला होता है।

 

 

गर्भकाल में कौन सी सहायक तकनीकें होती हैं ?

गर्भकाल में निम्नलिखित तकनीकें सहायक होती हैं 
(1) पीठ के बल लेटो सिर तकिये पर हो और टांगों का निचना भाग कुर्सी पर हो। आंखें बन्द कर के 10-15 मिनट तक आराम करें। पैरों और टखनों की सूजन से भी इस में राहत मिलती है।

(2) बगल से लेटो और सिर के नीचे तकिया रख लो, भुजा के ऊपरी भाग को ओर टांगों को ऊपर की ओर खीचों, घुटने के नीचे तकिया रख लो। टांग के निचले भाग को सीधा रखो। आंखे बन्द करो और मस्तिष्क को साफ करो। श्वास अन्दर भरो और दस तक गिनो। धीरे धीरे श्वास बाहर निकालो। पूरी तरह विश्राम करो।

गर्भवती महिला को बाई ओर सोना चाहिए, ऐसा सुझाव डॉक्टर क्यों देते हैं?

हालांकि पीठ के बल सोना शुरू में अधिक आरामदायक हो सकता है। इस से पीठ में दर्द और हॉरमोरोहोऑटाडस हो सकता है और पाचन, श्वसन और रक्त भ्रमण में रूकावट आती है ऐसा इसलिए क्योंकि गर्भाशय का सारा वज़न पीठ पर आ जाता है। जबकि बाई ओर के अंगों को सीधा करने से रक्त स्राव भरपूर होता है और बीजाण्ड है। जबकि बाई ओर के अंगों को सीधा करने से रक्त स्राव भरपूर होता है और बीजाण्ड का पोषण होता है, किडनी का कार्य सुचारू रूप से होता है जिस से मल का त्याग बेहतर रूप से होता है (जिसके न होने से सूजन आता है) अतः इसे अत्यन्त आरामदायक स्थिति माना जाना चाहिए।

एच आई वी और गर्भ

यदि मां में एच आई वी पॉजिटिव हो तो बच्चे के एच आई वी पॉजिटिव होने की कितनी सम्भावना होती है?

उसके एच आई वी पॉजिटिव होने की सम्भावना 25 प्रतिशत है।

ऐसी मां के पास कौन से विकल्प है जिनसे कि वह अपने बच्चे को इस रोग के संक्रमण से बचा सके?

एच आई वी पॉजिटिव महिला को गर्भकाल के दौरान अधुनातन व्यस्क निर्देशों के अनुसार संस्तुत जो भी इन्टीवाइरल कीमोथैरेपी हो उसे लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रसव के तीन घन्टे पूर्व तथा काट कर किए जाने वाले प्रसव के तौरान इन्टरावीनस थैरेपी के साथ इन्टीवाइरल लेना चाहिए। जन्म के पहले छ सप्ताह तक बच्चे का इन्टीवाइरल सिरप लेना होगा इस समय नये जन्मे बच्चे में इस के संक्रमण की सम्भावनाओं को न्यूनतम बनाने के लिए श्रेष्ठतम थैरेपी है। सुझाव है कि ऐसे में शल्यक्रिया द्वारा ही प्रसव करायें।

यदि महिला एन्टी वाइरल थैरेपी ले और सीजेरियन प्रसव कराये तो शिशु में संक्रमण की कितनी सम्भावना रह जाती है?

जब गर्म के दौरान महिला को एन्टी वाइरल थैरेपी दी जाती है तो संक्रमण की सम्भावना लगभग 8 प्रतिशत तक कम हो जाती है। जब शल्यक्रिया की जाती है और एन्टी वाइरल थैरेपी प्रसव के दौरान दी जाती है तो संक्रमण की दर भी घटकर 2 प्रतिशत रह जाती है।

 

गर्भ धारण

 

top women in the world