पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है अलसी

अलसी जिसे अतसी, उमा, क्षुमा, पार्वती, नीलपुष्पी, तीसी आदि नामों से भी पुकारा जाता है, एक आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक और चमत्कारी दिव्य भोजन है।

अलसी दुर्गा का पांचवा स्वरूप है। प्राचीनकाल में नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता यानी अलसी की पूजा की जाती थी और इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता था। जिससे पूरी सर्दी में मौसमी बीमारियां नहीं होती थी। मन को शांति मिलती थी, वात पित्त और कफ तीनों रोग दूर होते थे और जीते जी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती थी।

 
 

अलसी एक सम्पूर्ण आहार है जिसके मुख्य तत्व 18% प्रोटीन, 27% फाइबर, 18% ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिगनेन व सभी विटामिन और खनिज लवणों का भंडार हैं। लिगनेन है सुपर मेन तो ओमेगा-थ्री रोगों से करती है फ्री। शुद्ध, शाकाहारी, सात्विक, निरापद और आवश्यक ओमेगा-थ्री का खजाना है अलसी। कब्जासुर का वध करती है अलसी। आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है। मधुमेह जरासंध है तो भीमसेन है अलसी।

रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को स्वीपर की तरह साफ करती रहती है अलसी। कॉलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को सही रखती है अलसी। यानी हार्ट अटेक के कारण पर अटेक करती है अलसी।

मीनोपोज़ की तकलीफों पर पॉज़ लगा देती है अलसी।

पुरुषरोग में सस्टेन्ड रिलीज़  वियाग्रा है अलसी। जो अलसी खाये वो गाये जवानी ज़िंदाबाद बुढ़ापा बाय बाय।

पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है अलसी।

बॉडी बिल्डिंग के लिये नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।

फीलगुड फूड है सुपरस्टार अलसी। क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है और पति पत्नि झगड़ना छोड़कर चम्बल गार्डन में ड्यूएट गाते नज़र आते हैं।

माइन्ड का Sim card है अलसी यहां सिम का मतलब सेरीनिटी, इमेजिनेशन और मेमोरी तथा कार्ड का मतलब कन्सन्ट्रेशन, क्रियेटिविटी, अलर्टनेट, रीडिंग राईटिंग थिंकिंग एबिलिटी और डिवाइन है।

आपराधिक प्रवृत्ति से ध्यान हटाकर अच्छे कार्यों में लगाती है अलसी। इसलिये आतंकवाद का भी समाधान है अलसी। 

कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।

कई असाध्य रोग जैसे एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी।

त्वचा, केश और नाखुनों का जीर्णोद्धार करती है अलसी। सुरक्षित, स्थाई और आंतरिक सौन्दर्य प्रसाधन है अलसी। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, सूखी त्वचा, खुजली, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का सोता है अलसी।

जोड़ की तकलीफों का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया विकल्प है अलसी।

क्रूर, कुटिल, कपटी, कठिन, कष्टप्रद कर्करोग का  सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है अलसी। 

प्रतिदिन 30-60 ग्राम खानी चाहिये अलसी। रोज अलसी को मिक्सी के चटनी जार में सूखा पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, परांठा, बाटी या बाफला आदि बनाकर खायें।  

लेखक - Dr. O.P.Verma 7-B-43, Mahaveer Nagar III, Kota

 

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