डिंबवाहिनी नलिका के दोष (Oviduct tube defects) क्या है?

डिंबवाहिनी नलिका में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर स्त्री गर्भधारण नहीं कर पाती। डिंबवाहिनी नलिका के दोष आमतौर पर इस तरह के होते है-
1. पहला दोष यह है कि किसी स्त्री में डिंबवाहिनी नलिका ही नहीं होती। यदि होती भी है तो कटी-फटी या सूखी-मुरझाई हुई होती है। ऐसा जन्म से भी हो सकता है या किसी दुर्घटनावश भी हो सकता है।

 
 
 

2. डिंबवाहिनी नलिका का दूसरा दोष बचपन की किसी नादानी के कारण या किसी संक्रामक रोग से पीड़ित पुरुष के साथ समागम करने के कारण हो सकता है। ऐसे रोग डिंबवाहिनी नलिका के छिद्र में अवरोध पैदा कर गर्भित डिंब को गर्भाशय तक पहुंचना से रोकता है।
3. तीसरा दोष यह है कि जिस तरह मनुष्य के फेफड़े अत्यंत कोमल तंतुओं से बने होते हैं, उसी तरह स्त्री की डिंबवाहिनी नलिका भी कोमल तंतुओं से बनी होती है। कुछ स्त्रियां डिंबवाहिनी नलियों में टी.बी. हो जाने के कारण भी गर्भवती नहीं हो पाती।

4. चौथे दोष के रूप में स्त्रियां तब मां नहीं बन पाती जब डिंबवाहिनी नलियों में किसी कारण से कोई अवरोध बन जाता है। इस तरह की आशंका जान-बूझकर गर्भपात कराने वाली स्त्रियों में ज्यादा होती है क्योंकि गर्भपात कराने से कभी-कभी खून का थक्का या मांस का टुकड़ा डिंबवाहिनी नलिका के छिद्र द्वार पर फंस जाता है।
5. स्त्रियों के मां न बनने का पांचवा कारण है कभी-कभी स्त्री द्वारा जरूरत से ज्यादा उछल-कूद करना। ऐसे कारणों से डिंबवाहिनी नलियों में सूजन आ जाती है तथा स्त्री के पेट में नीचे की तरफ दाहिनी ओर दर्द रहने लगता है।

 

 

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